हिमालय बचाओ,पॉलीथिन हटाओ अभियान: खास मौके पर एक पौधा जरूर लगाएं : शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे

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हिमालय दिवस पर बुधवार को देहरादून से लेकर दिल्ली तक हिमालय संरक्षण की आवाज बुलंद हुई। देहरादून में ‘हिन्दुस्तान हिमालय बचाओ- पॉलीथिन हटाओ’ अभियान के तहत आयोजित ई-संवाद में निबंध लेखन, भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई। प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने विजेताओं के नाम की घोषणा करते हुए, ‘हिन्दुस्तान’ की पहल को सराहा।

ई-संवाद में अपर शिक्षा निदेशक आरके उनियाल भी शामिल हुए। इसका संचालन ‘हिन्दुस्तान’ के स्थानीय संपादक गिरीश गुरुरानी ने किया। इधर, दिल्ली में भी हैस्को की ओर से आयोजित कार्यक्रम में देश की दिग्गज हस्तियों ने भागीदारी की। क्षा मंत्री अरविंद पांडे ने युवा पीढ़ी से अपनी हर खुशी के मौके पर एक पौधा लगाने की अपील की है।

बुधवार को ‘हिन्दुस्तान ई-संवाद’ में प्रतिभाग करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी आयोजन में छात्रों को जोड़ने से, उसका समाज पर दीर्घकालीन असर पड़ता है। ‘हिन्दुस्तान’ का ‘हिमालय बचाओ अभियान’ इस मामले में लंबी लकीर खींच रहा है।  आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ की ओर से बुधवार को ‘हिमालय बचाओ अभियान में छात्रों की भूमिका’ विषय पर आयोजित ई-संवाद में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कहा कि ‘हिन्दुस्तान’ समाचार पत्र हर साल पूरी प्रतिबद्धता के साथ ‘हिमालय बचाओ अभियान’ संचालित कर रहा है।

‘हिन्दुस्तान हिमालय बचाओ अभियान’ नई पीढ़ी में हिमालय की समझ बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण का जीवन में बड़ा महत्व है। ऑक्सीजन हमारे लिए बहुत जरूरी है। इन बातों को हम तब महसूस करते हैं, जब हमारे परिजन बीमार होकर अस्पताल पहुंच जाते हैं। स्वस्थ जीवन, निरोगी काया के लिए वायुमंडल का स्वच्छ होना बहुत जरूरी है।

यह तभी हो पाएगा, जब हमारा हिमालय स्वच्छ रहेगा। जब हिमालय की सेहत ही ठीक नहीं रहेगी तो हमारा जीवन भी सुरक्षित नहीं रहेगा। हिमालयी क्षेत्र का स्वच्छ व स्वस्थ रहना बहुत जरूरी। हमें अधिक से अधिक संख्या में पौधरोपण पर ध्यान केंद्रित करना होगा। वृक्ष नहीं होंगे तो हमें साफ हवा, अन्न, पानी कहां से मिलेगा।

हिमालयी पर्यावरण का स्वच्छ रहना हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। ईश्वर ने हमें मानव स्वरूप दिया है हमें लम्बा मगर स्वस्थ जीवन जीकर इसका लाभ उठाना चाहिए। हिमालय के महत्व को समझने का यही समय है। यदि हिमालय नहीं रहेगा तो हमारा जलवायु चक्र बदल सकता है।

अपनी वन संपदा के लिए प्रख्यात यह जगह रेगिस्तान में बदल सकती है। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील करते हुए कहा कि वो अपने जन्मदिन या हर खुशी के मौके पर एक पौधा जरूर लगाएं। जब आप बड़े होंगे तो ये पौधे आपको बीते हुए दिनों की याद दिलाएंगे।

हमारी सांस्कृतिक धरोहर है हिमालय : उनियाल
देहरादून | हिमालय दिवस पर आयोजित ई-संवाद में अपर शिक्षा निदेशक विद्यालयी शिक्षा आरके उनियाल भी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि हिमालय हमारे लिए एक बर्फ की शिला ही नहीं, बल्कि हमारे लिए पौराणिक, आध्यात्मिक महत्व की गौरवमयी पर्वत माला है। इसका युगों पुराना इतिहास रहा है। हिमालय हजारों सालों से धरती को सिंचित व हरा-भरा बनाए हुए है। पूरा देश इससे लाभांवित होता है। यहां से निकलने वाली सदानीरा नदियां व अन्य संसाधन हमारे जीवंत समाज का निर्माण करती हैं।

उनियाल ने कहा कि ‘हिन्दुस्तान का हिमालय बचाओ अभियान’ नई पीढ़ी को काफी कुछ सिखाता है। हिमालय से परिचित कराता है। हिमालय के लिए यह चिंता जायज है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हमारा पर्यावरण दूषित होता जा रहा है। पॉलीथिन का बढ़ता इस्तेमाल पर्यावरण के लिए घातक है। विकास के साथ साथ हमें मानवता की रक्षा का भी दायित्व निभाना होगा।

पॉलीथिन का इस्तेमाल भले रोका नहीं जा सकता, उसे कम जरूर किया जाना चाहिए। खासकर प्राकृतिक जलधाराओं में पॉलीथिन न जाए इसका ध्यान रखना होगा। घर के कचरे का निस्तारण जरूरी है। टाउन प्लानिंग ऐसे हो कि हमारे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। हमारे यहां कई मनीषियों ने हिमालय की रक्षा के लिए काम किया है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा, चंडीप्रसाद भट्ट जैसे बड़े नाम यहां हैं। हमें इनके कार्यों से भी प्रेरणा लेनी चाहिए। हमारी जलधाराएं-जीवनधाराएं बची रहे इसके लिए हिमालय का करना होगा। जल, जंगल जमीन में रहने वाले पादप, जीवों का संरक्षण भी करना होगा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें खुद ही वेस्ट वॉरियर बनना होगा।

उनियाल ने कहा कि पर्यावरण बचे रहने से हम भी बचे रहेंगे, हमारी संस्कृति बची रह सकती है। पूरा विश्व कोविड से प्रभावित हैं और हम लगातार इससे लड़ भी रहे हैं। हमारे पास योग, आयुर्वेद, पूजा पाठ, पशुपालन हमारी दिनचर्या प्राचीन समय से ही प्रकृति के अनुकुल रही है। मौजूदा दौर ने भारतीय संस्कृति चिंतन को महत्वपूर्ण बना दिया है। पर्यावरण यदि सुरक्षित रहेगा तो हम भी सुरक्षित रहेंगे।

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