एक ही छत के नीचे आते जा रहे खाड़ी के अरब देश, अब सऊदी अरब के इजरायल को अपनाने की बारी

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 अमेरिकी चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को शामिल करते हुए चुनाव जीतने की बिसात बिछा रहे हैं, इसी कड़ी में बहरीन और इजरायल के बीच समझौते को भी देखा जा रहा है।

समझौते के बाद बहरीन मध्य-पूर्व का महज चौथा अरब देश बन गया है, जिसने 1948 में इजरायल की स्थापना के बाद से उसे मान्यता दी है। अगस्त में यूएई की घोषणा से पहले, इजरायल का खाड़ी के अरब देशों के साथ कोई राजनयिक संबंध नहीं था। पिछले महीने इजरायल और यूएई के बीच पहली आधिकारिक उड़ान भरी गई, जिसे रिश्ते सामान्य करने के क्रम में एक बड़ा कदम माना गया।

दरअसल दशकों से अधिकतर अरब देश ये कहते हुए इजरायल का बहिष्कार करते रहे हैं कि वो फलीस्तीनी विवाद के निपटारे के बाद ही इजरायल से संबंध स्थापित करेंगे लेकिन पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई भी इजरायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करने पर सहमत हुआ था तभी से ये अटकलें लगाई जा रही थीं कि बहरीन भी ऐसा ही कर सकता है। बीते शुक्रवार को दोनों देशों के बीच समझौता हो ही गया।राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किया कि 30 दिनों के अंदर इजरायल के साथ शांति समझौता करने वाला दूसरा अरब देश बहरीन। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर अमेरिका, बहरीन और इजरायल के संयुक्त बयान की कॉपी भी साझा की। लिखा है कि मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए ये एक ऐतिहासिक सफलता है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वो उत्साहित हैं कि शुक्रवार को एक अन्य अरब देश के साथ एक और शांति समझौता हुआ है।

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