बॉब वुडवर्ड की किताब में खुलासा, तानाशाह किम जोंग दहशत पैदा करने के लिए अपनाता है कैसे तरीके

नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की तानाशाही के बारे में अक्सर लोग सुनते रहते हैं। तानाशाह किम को एक क्रुर शासक के तौर पर जाना जाता है। किम को इतना क्रुर कहा जाता है कि वो अपने रिश्तेदारों को भी कठोर से कठोर सजा देने में जरा भी वक्त नहीं लगाता है। यदि किसी ने उसके नियम कानूनों के खिलाफ काम किया तो उसका मरना तय माना जाता है फिर चाहे वो तानाशाह के परिवार या खून के रिश्ते वाला ही क्यों न हो। अमेरिका के खोजी पत्रकार…

आर्थोस्कोपी तकनीक से हुआ मल्टिपल लिगामेंट नी ज्वाइंट का इलाज

o   इलाज के एक दिन बाद ही मरीज का बिना किसी सहारे चलना फिरना हुआ संभव लखनऊ 14  फरवरी 2019 आर्थोस्कोपी तकनीक के ज़रिये रेडियस ज्वाइंट सर्जरी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने मल्टिपल लिगामेंट नी इंजरी से ग्रस्त मरीजका बिना चीरा लगाए सफलतापूर्वक इलाज कर इस गंभीर समस्या से निजात दिलाई। यह प्रक्रिया जोड़ो के क्षतिग्रस्त भीतरी हिस्से का इलाज करने केलिए की जाती है जिसमे गंभीर रूप से ग्रस्त लिगामेंट का इलाज एक आर्थोस्कोप की सहायता से किया जाता है। मरीज लखनऊ के जानकीपुरमएक्सटेंशन का निवासी है। तीन घंटे तक चलने वाली यह सर्जरी रेडियस ज्वाइंट सर्जरी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर संजय श्रीवास्तव केसाथ डॉ0  मनीष पांडे,  डॉ0  शिशिर, एनेस्थेटिस्ट द्वारा छोटा सा छेद कर दूरबीन की मदद से की गई। रेडियस ज्वाइंट सर्जरी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ संजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “ जोड़ो के जटिल बनाव के कारण मल्टिपल लिगामेंट नीइंजरी की यह सर्जरी एक चुनौतीपूर्ण सर्जरी रही। अमूमन इस तरह की इंजरी खेल, उचाई से गिरने से या फिर किसी एक्सिडेंट के चपेट में आ जाने सेहोती है। एक दुर्घटना के बाद घुटने में अंदरूनी चोट लगने तथा बैलेंस ना बन पाने के कारण मरीज चलने में असमर्थ था और पिछले कुछ हफ्तों से बिस्तर परथा। मरीज इसके इलाज के लिये काफी दिन से प्रयासरत था। किन्तु उसे कहीं से त्वरित इलाज नहीं मिला। मरीज को तब रेडियस ज्वाइंट सर्जरीहॉस्पिटल में रेफर किया गया, जहाँ पर आर्थोस्कोपी तकनीक के ज़रिये उसकी सर्जरी की गई। इस जटिल सर्जरी के पश्चात इलाज के दूसरे दिन से हीमरीज स्वयं बिना किसी सहारे के चलने फिरने में सक्षम रहा।

अपोलो-मेडिक्स ने सीएमएस में सैनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाई

लखनऊ 21 जनवरी 2019 पीरियड्स यानी माहवारी एक ऐसा विषय है जिसके संबंध में आज भी हमारे समाज में खुलकर बात नहीं की जाती है। आज भी पीरियड्स के संबंध में लोगों का ज्ञान आधा-अधूरा ही है। यह बात आज अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल के संस्थापक डॉ0 सुशील गट्टानी ने सिटी मोन्टेसरी स्कूल की गोमतीनगर एक्सटेंशन शाखा में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के दौरान की कही। अपोलो मेडिक्स और पन्थलासा एनजीओ की सीईओ व संस्थापक, श्री मृणालिनी मित्रा ने स्कूल में सैनेटरी नैपकिन वैंडिग मशीन की स्थापना की। अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी…

लखनऊ 13  जनवरी 2019: गुरु गोबिंद सिंह जयंती के उपलक्ष में अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल ने 13 जनवरी को प्रातः 11 बजे से 3 बजे तक गुरुद्वारा नाका चैराहा और  गुरूद्वारे के पास स्थित डीएवी कॉलेज के पास स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। दिवसीय शिविर के दौरान, लखनऊ के आशियाना स्थित अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों द्वारा अलग-अलग रोगों के मरीजों की सघन जांच किया तथा लगभग 500 मरीज़ो को नि: शुल्क परामर्श प्रदान किया। शिविर के दौरान अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉ राहुल यादव (  यूरोलौजिस्ट),…

मंदिरों की मणिमाला का मोती है जगत का अम्बिका मंदिर

सरस्वती, नृत्य भाव में गणपति, महिषासुर मर्दिनी, नवदुर्गा, वीणाधारिणी, यम, कुबेर, वायु, इन्द्र, वरूण, प्रणय भाव में युगल, अंगड़ाई लेते हुए व दर्पण निहारती नायिका, शिशु क्रीडा, वादन, नृत्य आकृतियां एवं पूजन सामग्री सजाये रमणी आदि कलात्मक प्रतिमाओं का अचंभित कर देने वाली मूर्तियों का खजाना और आदित्य स्थापत्य कला को अपने में समेटे जगत का अम्बिका मंदिर राजस्थान के मंदिरों की मणिमाला का मोती कहा जा सकता है। मूर्तियों का लालित्य, मुद्रा, भाव, प्रभावोत्पादकता, आभूषण, अलंकरण, केशविन्यास, वस्त्रों का अंकन और नागर शैली में स्थापत्य का आकर्षण इस शिखरबंद…

तुलसी का पौधा हर दृष्टि से लाभकारी है, यह वास्तु दोष से भी बचाता है

भोपाल। यदि घर में कलह का वातावरण देखने मिले तो समझ लीजिए वास्तु दोष है। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, किंतु यदि घर की बनावट व्यवस्थित नहीं है तो आमतौर पर वास्तु ही इसका एक प्रमुख कारण माना जाता है। ऐसे में कई तरह के उपाय बताए जाते हैं, लेकिन यह अनेक बार कठिन होने के साथ ही ऐसे भी होते हैं जो साधारण मनुष्य के लिए कर पाना संभव नहीं होता। इन परिस्थितियों में साधारण दिखने वाला तुलसी का पौधा आपकी अनेक मुश्किलों का समाधान कर सकता…

बचपन से ही सेवा भाव रखते थे गुरु नानक देव, यह रहीं उनकी दस शिक्षाएं

गुरु नानक देवजी सिखों के पहले गुरु थे। अंधविश्वास और आडंबरों के कट्टर विरोधी गुरु नानक का प्रकाश उत्सव (जन्मदिन) कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है हालांकि उनका जन्म 15 अप्रैल 1469 को हुआ था। पंजाब के तलवंडी नामक स्थान में एक किसान के घर जन्मे नानक के मस्तक पर शुरू से ही तेज आभा थी। तलवंडी जोकि पाकिस्तान के लाहौर से 30 मील पश्चिम में स्थित है, गुरु नानक का नाम साथ जुड़ने के बाद आगे चलकर ननकाना कहलाया। गुरु नानक के प्रकाश उत्सव पर प्रति वर्ष भारत से…

भगवान शंकर का अवतार माना जाता है बजरंग बली को

बजरंग बली हनुमान जी को भगवान शंकर का अवतार भी माना जाता है। मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की सेवा के निमित्त भगवान शिव जी ने एकादश रुद्र को ही हनुमान के रूप में अवतरित किया था। हनुमान जी चूंकि वानर−उपदेवता श्रेणी के तहत आते हैं इसलिए वे मणिकुण्डल, लंगोट व यज्ञोपवीत धारण किए और हाथ में गदा लिए ही उत्पन्न हुए थे। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि उपदेवताओं के लिए स्वेच्छानुसार रूप एवं आकार ग्रहण कर लेना सहज सिद्ध है। पुराणों के अनुसार, इस धरा पर जिन…

ओरल कैंसर पर सेमीनार का आयोजन

लखनऊ 19  नवंबर 2018: अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने बीबीडी( बाबू बनारसी दास युनिवर्सिटी) लखनऊ  में मौखिक स्वच्छता (ओरल हाइजीन) पर ध्यान केंद्रित करते हुए ओरल कैंसर व टयुमर  की पहचान और उपचार पर एक कार्यक्रम और वैज्ञानिक सत्र का आयोजन किया। यह सत्र डॉ० हर्षवर्धन आत्रेय, ओन्को सर्जन, अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल और डॉ० नरवेश कुमार, (न्यूक्लिअर चिकित्सा, पीईटी-सीटी और  रेडियो न्यूक्लियर थेरेपिस्ट, अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी अस्पताल) द्वारा संबोधित किया गया था। सेमिनार में कैंसर के बारे में नवीनतम उपचारों को लेकर भी जानकारी दी गई। अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के ओन्को सर्जन, डॉ०…

पुत्र की लंबी आयु और सुखमय जीवन के लिए किया जाता है अहोई अष्टमी का व्रत

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई माता का व्रत किया जाता है। इस दिन पुत्रवती स्त्रियां निर्जल व्रत रखती हैं। इस दिन शाम के समय दीवार पर आठ कोनों वाली एक पुतली बनाई जाती है। पुतली के पास ही स्याउ माता व उसके बच्चे बनाए जाते हैं। इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्ध्य देकर कच्चा भोजन खाया जाता है तथा तारों को करवा से अर्घ्य दिया जाता है। यह व्रत करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अष्टमी तिथि को पड़ता है। इस दिन पुत्रवती स्त्रियां…