मंदिरों की मणिमाला का मोती है जगत का अम्बिका मंदिर

सरस्वती, नृत्य भाव में गणपति, महिषासुर मर्दिनी, नवदुर्गा, वीणाधारिणी, यम, कुबेर, वायु, इन्द्र, वरूण, प्रणय भाव में युगल, अंगड़ाई लेते हुए व दर्पण निहारती नायिका, शिशु क्रीडा, वादन, नृत्य आकृतियां एवं पूजन सामग्री सजाये रमणी आदि कलात्मक प्रतिमाओं का अचंभित कर देने वाली मूर्तियों का खजाना और आदित्य स्थापत्य कला को अपने में समेटे जगत का अम्बिका मंदिर राजस्थान के मंदिरों की मणिमाला का मोती कहा जा सकता है। मूर्तियों का लालित्य, मुद्रा, भाव, प्रभावोत्पादकता, आभूषण, अलंकरण, केशविन्यास, वस्त्रों का अंकन और नागर शैली में स्थापत्य का आकर्षण इस शिखरबंद…

तुलसी का पौधा हर दृष्टि से लाभकारी है, यह वास्तु दोष से भी बचाता है

भोपाल। यदि घर में कलह का वातावरण देखने मिले तो समझ लीजिए वास्तु दोष है। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, किंतु यदि घर की बनावट व्यवस्थित नहीं है तो आमतौर पर वास्तु ही इसका एक प्रमुख कारण माना जाता है। ऐसे में कई तरह के उपाय बताए जाते हैं, लेकिन यह अनेक बार कठिन होने के साथ ही ऐसे भी होते हैं जो साधारण मनुष्य के लिए कर पाना संभव नहीं होता। इन परिस्थितियों में साधारण दिखने वाला तुलसी का पौधा आपकी अनेक मुश्किलों का समाधान कर सकता…

बचपन से ही सेवा भाव रखते थे गुरु नानक देव, यह रहीं उनकी दस शिक्षाएं

गुरु नानक देवजी सिखों के पहले गुरु थे। अंधविश्वास और आडंबरों के कट्टर विरोधी गुरु नानक का प्रकाश उत्सव (जन्मदिन) कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है हालांकि उनका जन्म 15 अप्रैल 1469 को हुआ था। पंजाब के तलवंडी नामक स्थान में एक किसान के घर जन्मे नानक के मस्तक पर शुरू से ही तेज आभा थी। तलवंडी जोकि पाकिस्तान के लाहौर से 30 मील पश्चिम में स्थित है, गुरु नानक का नाम साथ जुड़ने के बाद आगे चलकर ननकाना कहलाया। गुरु नानक के प्रकाश उत्सव पर प्रति वर्ष भारत से…

भगवान शंकर का अवतार माना जाता है बजरंग बली को

बजरंग बली हनुमान जी को भगवान शंकर का अवतार भी माना जाता है। मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की सेवा के निमित्त भगवान शिव जी ने एकादश रुद्र को ही हनुमान के रूप में अवतरित किया था। हनुमान जी चूंकि वानर−उपदेवता श्रेणी के तहत आते हैं इसलिए वे मणिकुण्डल, लंगोट व यज्ञोपवीत धारण किए और हाथ में गदा लिए ही उत्पन्न हुए थे। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि उपदेवताओं के लिए स्वेच्छानुसार रूप एवं आकार ग्रहण कर लेना सहज सिद्ध है। पुराणों के अनुसार, इस धरा पर जिन…

पुत्र की लंबी आयु और सुखमय जीवन के लिए किया जाता है अहोई अष्टमी का व्रत

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई माता का व्रत किया जाता है। इस दिन पुत्रवती स्त्रियां निर्जल व्रत रखती हैं। इस दिन शाम के समय दीवार पर आठ कोनों वाली एक पुतली बनाई जाती है। पुतली के पास ही स्याउ माता व उसके बच्चे बनाए जाते हैं। इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्ध्य देकर कच्चा भोजन खाया जाता है तथा तारों को करवा से अर्घ्य दिया जाता है। यह व्रत करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अष्टमी तिथि को पड़ता है। इस दिन पुत्रवती स्त्रियां…

दीवाली पर इस तरह बनाएं रंगोली, घर आंगन खिल उठेगा

दीवाली के अवसर पर घर को सजाने के लिए लोग दिए, कंदिल, बन्दनवार आदि का सहारा लेते हैं लेकिन अगर फर्श पर रंगोली न बनाई जाए तो दीवाली की सजावट अधूरी-सी ही लगती है। अगर आप भी अपने आंगन को रंगोली की मदद से सजाने का मन बना रहे हैं तो इन विभिन्न रंगोली का इस्तेमाल कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में− फूलों की रंगोली देखने में बेहद ही खूबसूरत लगती है और इसे बनाना भी बेहद आसान होता है। इसके लिए आप फूलों की पंखुडि़यों को…

अपनी राशि के अनुसार इस तरह करें दीवाली पर लक्ष्मी पूजन

दीवाली के उत्सव पर यूं तो हर व्यक्ति मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए उनकी आराधना करता है। भक्तगण उनकी कृपा पाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। लेकिन अक्सर देखने में आता है कि कुछ लोगों पर मां की कृपा होती है तो कुछ मुफलिसी के दिन गुजारते हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है। जिस तरह हर व्यक्ति अलग होता है, उसकी राशि व ग्रह−नक्षत्र भी अलग होते हैं और उसके ग्रहों की दशाओं का उसके जीवन पर व्यापक प्रभाव…

गणपति बप्पा की मूर्ति की स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी गणेशजी के पूजन और उनके नाम का व्रत रखने का विशिष्ट दिन है। प्राचीन काल में बालकों का विद्या अध्ययन आज के दिन से ही प्रारम्भ होता था। विनायक, सिद्ध विनायक और कर्पादि विनायक भी गणेशजी के ही नाम हैं और यही कारण है कि कई नामों से इस व्रत को पुकारा जाता है। इस दिन गणपति की मूर्ति को धूमधाम से घर पर लाना चाहिए। घर में गणपति की प्रतिमा को प्रवेश कराते समय कंधे पर बैठाकर लायें और गणपति बप्पा मोरया…

निर्माण के देवता विश्वकर्मा जी की जयंती पर इस तरह करें पूजन

भोपाल। युवा पीढ़ी द्वारा भगवान विश्वकर्मा को इंजीनियर भी कहा जाता है। ऐसा हो भी क्यों ना आखिर हमारे वेदों और पुराणों में इनका वर्णन ही कुछ ऐसा है। दरअसल, इन्हें सुंदर भवन बनाने वाले के रूप में जाना जाता है। इन्होंने सिर्फ भवन ही नहीं बनाए, बल्कि अनेक शस्त्रों का भी निर्माण किया जो हमें देवताओं के हाथों में देखने मिलते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की द्वारकापुरी भी इनके बिना पूरी नहीं होती, इसके अतिरिक्त भी जितने भव्य भवनों और मंदिरों का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है, अधिकांश का निर्माण…

पितरों की नाराजगी से बचें, पितृपक्ष में इन बातों का रखें खास ध्यान

 पितर या पितृ, हिंदू धर्म में इन दिनों का अत्यधिक महत्व है। इन विशेष दिनों में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं उन्हें पानी देते हैं, उनका श्राद्ध, तर्पण करते हैं। इन दिनों का इंतजार साल भर किया जाता है। सिर्फ उनके द्वारा नहीं जो जीवित हैं, बल्कि उनके द्वारा भी जो अब परलोक गमन कर चुके हैं। शास्त्रों में इसका महत्व बताया गया है। यहां हम इन दिनों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें आपको बताने जा रहे हैं। लगता है पितृदोष पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है…